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शुभ मंगल सावधान : शादी से पहले का प्रावधान

फिल्म ‘विक्की डोनर’ में स्पर्म डोनेट करने के बाद आयुष्मान खुराना को ‘शुभ मंगल सावधान’ में इरेक्टाइल डिसफंक्शन होना तो लाज़मी था..खैर उपरोक्त लिखे गये वाक्य को एक हंसी के माध्यम से देख सकते है ।
बात करे इस शुक्रवार की तो सिल्वर स्क्रीन पर दस्तक दी है आयुष्मान एवं भूमि अभिनीत शुभमंगल सावधान ने जिसका सीधा मुकाबला बादशाहो से है । शुभ मंगल सावधान 2013 में आई तमिल फिल्म कल्याण समायल साधम् की हिंदी रीमेक है, इसके तमिल वर्जन के निर्देशक आर. एस. प्रसन्ना है  हिंदी वर्जन भी उन्होंने ही निर्देशित किया है, कहते है सिनेमा समाज का दर्पण होता है और सिनेमा का असर समाज पर काफी हद तक पड़ता है  ऐसे में इस तरह की फिल्म का आना एक रिवोलुशन की तरह काम करता है , इसको देखने वाले युवा लड़के-लड़कियों में निश्चित तौर पर एक ऐसे विषय को लेकर जागरूकता बढ़ेगी, जिसके बारे में हमारे समाज में बात करने से अक्सर लोग हिचकिचाते है, ज्ञात हो कुछ साल पहले आयी आयुष्मान अभिनीत विक्की डोनर जो की स्पर्म डोनेट पर आधारित थी उस फिल्म ने भी देशभर में युवाओं में एक रिवोलुशन सा ला दिया था ।
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बात करे शुभ मंगल सावधान की तो कहानी दिल्ली के रहने वाले दो किरदारों के इर्द गिर्द ही घूमती है मुदित एवं सुगंधा की । फिल्म में मुदित शर्मा बने आयुष्मान खुराना एवं सुगंधा यानी भूमि पेडनेकर को हर रोज ताड़ते हैं वहीं मुदित सुगंधा को कुछ भी कहने या उसके सामने आने से भी डरता है। सुगंधा मुदित को नोटिस करती हैं और पसंद भी करती है। दोनों एक दूसरे से बेइंतेहा प्यार करने लगते हैं। अब घर वालों को भी शादी के लिए राजी किया जाता है। मुदित सुगंधा की सगाई भी हो जाती है लेकिन शादी से पहले सम्बन्ध बनाते वक़्त सुगंधा को मुदित के इरेक्टाइल डिसफंक्शन यानी सेक्सुअल प्रॉब्लम के बारे में पता चलता है जब वो दोनों सम्बन्ध नही बना पाते (हालाँकि फिल्म में ‘इरेक्टाइल डिसफंक्शन’ का नाम कहीं नहीं लिया गया है लेकिन चाय में डूबे बिस्कुट और धीरे-धीरे टपकते नल जैसे सीन युवाओं को समझाने के लिए  काफी है ) इस बारे में लड़की के घर वालों को भी पता चल जाता है जिससे दोनों की शादी में काफी अड़चने पैदा हो जाती है जहाँ मुदित सुगंधा के लिए कुछ भी करने को तैयार है वहीं सुगंधा भी मुदित की मुश्किल का हल ढूँढने में लगी हुई है वह हर विषम समय में मुदित का साथ देती है ,मुदित के लिये किसी भी हद से गुजरने के लिये तैयार रहती है लेकिन क्या इनकी मुश्किले हल हो पायेगी..क्या दोनों की शादी हो पायेगी ? इसके लिये आपको फिल्म को देखना होगा ।
इस फिल्म की कहानी इसकी मेन यूअसपी है इंटरवल तक फिल्म काफी बढ़िया है पर इंटरवल के बाद थोडा लय खोती नजर आती है जिस कारण फिल्म का क्लाइमेक्स कुछ ज्यादा प्रभावित नही करता ।
फिल्म का निर्देशन अच्छा है और आर एस प्रसन्ना ने कहीं से भी यह लगने नहीं दिया कि यह उनकी हिंदी की पहली फिल्म है । फिल्म के डायलॉग्स भी काफी रोचक है कही कही डबल मीनिंग का ओवरडोज़ भी दे जाते है जैसे अलीबाबा और चालीस चोर वाला डायलाग तो वही बिस्किट वाला सीन भी बड़ा दिलचस्प रखा गया है जो इस फिल्म की कहानी की एक परत खोलता है ऐसे सीन्स को देखकर कुछ युवा आगे से अपनी रोजाना ज़िन्दगी में बिस्किट डुबाते हुए बचते नजर आएंगे । फिल्म का म्यूजिक और लिरिक्स किरदारों को ध्यान में रखते हुए रखे गए है जो इस फिल्म को मजबूती प्रदान करते है बात अभिनय की करे तो आयुष्मान और भूमि दम लगा के हइशा के बाद दोबारा एक साथ आये है दोनों ने सहज अभिनय किया है ,’क्या हुआ मुदित ,बोलो ना’ जैसे डायलॉग्स के दौरान भूमि की चाहत चेहरे पर साफ़ देखी जा सकती है जिस कारण वो दर्शकों को बांधे रखती है वही बिजेंद्र काला हमेशा की तरह अपनी छाप छोड़ जाते है । शादी से पहले सेक्स की वकालत करती इस फिल्म को मैं पांच में से साढ़े तीन स्टार देता हूँ ,जिसको देखने से युवा खुद को रोक नही पायेंगे ।

Mudit Bansal
Engineer By Education| Lyricist | Critic| Author | Art in Heart |
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