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डैडी : अंडरवर्ल्ड से राजनेता

सत्या ,कंपनी ,डी , डी डे जैसी तमाम गैंगस्टर फिल्मो ने डॉन हाजी मस्तान, डॉन दाऊद इब्राहिम, डॉन माया डोलस की जिंदगी को परदे पर साकार किया है लेकिन इस शुक्रवार सिल्वर स्क्रीन पर दस्तक दी है अरुण गवली ने अर्थात अर्जुन रामपाल अभिनीत ‘डैडी’ ने। फिल्म ‘डैडी’ एक अंडरवर्ल्ड डॉन की कहानी है जो अंडरवर्ल्ड डॉन से राजनीतिज्ञ बन चुके है ज्ञात हो अरुण गवली की कहानी हिंदी दर्शकों के लिए पहली बार परदे पर साकार हुई है ,अब देखना दिलचस्प होगा क्या अरुण गवली की कहानी लोगो को लुभा पाती है या नही ।
कहानी 80 के दशक के एक मिल मज़दूर के बेटे अरुण गवली की है जो बाबू रेशीम यानी आनंद इंगले, रामा नाईक यानी राजेश शृंगारपुरे के साथ मिलकर ब्रा (BRA) गैंग बनाते हैं। जुर्म के रास्ते पर चलते हुए अरुण और उसके साथियों की मुलाकात मकसूद भाई यानी फ़रहान अख्तर से होती है। ब्रा गैंग मक़सूद भाई के साथ मिलकर काम करती है लेकिन आगे दोनों के बीच मतभेद आ जाते है जिस कारण रामा का एनकाउंटर हो जाता है अब ब्रा गैंग की ज़िम्मेदारी अरुण गवली पर आती है ,अपने गैंग के रुतबे को कायम रखने के लिये  वो दगड़ी चॉल को अपना किला बनाता है फिर हुए 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के बाद अरुण गवली का मुंबई में प्रभाव बढ़ जाता है और वो चुनाव लड़कर विधायक  बन जाता है गवली के यहां तक का सफर कैसे पहुँचा अर्थात वो कैसे अंडरवर्ल्ड में आया, कितने खून किए, किस तरह से वो राजनीति में आया और कैसे जेल गया ये सब देखने के लिये आपको सिल्वर स्क्रीन का रुख करना होगा ।
 इंटरवल तक गवली को डॉन के रूप में चमकता हुआ दिखाया गया है जबकि सेकंड हॉफ में अरुण गवली की निजी जिंदगी से लेकर उसके राजनेता बनने तक का सफर दर्शाया गया है ,एक मुस्लिम लड़की ज़ुबैदा से शादी करने के कारण गवली की धर्मनिरपेक्ष छवि भी दिखाई गई है हालांकि वह अपनी पत्नी का धर्म परिवर्तन करा देता है पर मुंबई दंगों के दौरान गवली को दोनों धर्मों के लोगों की मदद करने वाला दिखाया गया है जो की दर्शकों में एक सुकून देता है फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसमें प्रयोग हुए कलर फ्रेम है जो काफी म्यूट है जिस कारण नृशंस हत्या रुपी दृश्य लोगो में खौफ नही जगा पाते वही फिल्म का पहला भाग भी काफी धीमा है । अदाकरी में अर्जुन रामपाल ने अरुण गवली की भूमिका बेहतरीन तरीके से अदा की है, फिल्म में अरुण गवली जैसा दिखने के लिए उनकी नाक और माथे में बदलाव किया गया इस कारण अर्जुन के चेहरे में काफी कुछ गवली की छाप दिखती है फिल्म के मुख्य पोस्टर से कही नही झलकता कि यह अर्जुन रामपाल ही है  ,फिल्म में अर्जुन की आवाज़ और उनकी डायलॉग डिलिवरी किरदार को और मज़बूत बना देती हैं वही सिगार दबाए, फोल्डेन फ्रेम के चश्मे और भारी भरकम मूंछों में फरहान अख्तर अपनी आवाज की वजह से मोस्ट वांटेड की भूमिका में न्याय नही कर पाते जो फिल्म का कमजोर पक्ष  साबित हुआ है।
फिल्म का बैक ग्राउंड स्कोर काफी प्रभावशाली है एवं ‘डांस डांस ‘सांग में अलीशा चिनॉय ने अपनी आवाज से फिर साबित कर दिया है कि आज भी उनकी कोई सानी नही है ,वही गणेश वंदना हमेशा की तरह गैंगस्टर फिल्मो में हिट रहा है।  कुल मिलाकर अगर आप गैंगस्टर फिल्म के शौकीन है और आगामी 22 सितम्बर को हसीना पारकर देखने जा रहे है तो ये फिल्म आपके लिये एक होमवर्क की तरह साबित होगी । मैं इस फिल्म को पांच में से ढाई स्टार देता हूँ ।

Mudit Bansal
Engineer By Education| Lyricist | Critic| Author | Art in Heart |
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