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बाबूमोशाय बंदूकबाज : देशीपना इसकी USP

इस शुक्रवार सिल्वर स्क्रीन पर दस्तक दी है तक़रीबन 6 फिल्मो ने जिनमे सभी को बहुत कम ही स्क्रीन्स मिली है
जिनमे मुख्यतः बाबूमोशाय बंदूकबाज भी शामिल है नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और बिदिता बेग के बोल्ड सीन्स की वजह से यह फिल्म काफी चर्चाओं में रही है आख़िरकार ज्ञात हो सेंसर बोर्ड ने शुरू में सख्ती दिखाते हुए फिल्म के 48 सीन्स पर कैंची चलाने का आदेश दिया था हालांकि बाद में 10 कट्स के बाद सेंसर बोर्ड ने इसे हरी झंडी दिखाई है ,फिल्म का बजट काफी सीमित रखा गया है जो की 5 करोड़ बताया जा रहा है ,फिल्म का निर्देशन किया है कुशल नंदी ने ।

फिल्म ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ कहानी है बाबू बिहारी यानी नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की जो कि पेशे से एक कॉन्ट्रेक्ट किलर है , बाबू देशी नेता जीजी यानी दिव्या दत्ता के लिए काम करता है लेकिन एक दिन, जब बाबू जीजी के खास आदमी को मारने की सुपारी ले लेता है तो जीजी और बाबू के बीच दुश्मनी हो जाती है और बाबू दुबे के लिये काम करना शुरू करदेता है ।एक दिन बाबू की मुलाकात जूते चप्पल सीने वाली फुलवा यानी बिदिता बाग़ से होती है और बाबू को फुलवा से पहली ही नजर में प्यार हो जाता है। इसी बीच फिल्म में दूसरे कॉन्ट्रेक्ट किलर बांके बिहारी की एंट्री होती है जो बाबू बिहारी का बहुत बड़ा फैन है अर्थात बांके बिहारी भी बाबू बिहारी की तरह  नंबर वन कॉन्ट्रैक्टर बनना चाहता है। अब दुबे बाबू को 3 लोगों को मारने की सुपारी देता है। लेकिन यही सुपारी दूसरे सुपारी हत्यारे बांके बिहारी यानी जतिन गोस्वामी को भी यही सुपारी दी जाती है हालाँकि बांके, बाबू को अपना गुरु मानता है, इसलिए दोनों के बीच एक सौदा तय होता है जो 3 में से 2 लोगों को मारेगा वही सुपारी का हकदार होगा। लेकिन जब बांके बिहारी बाबू बिहारी को गोली मार देता है फिर… क्या दिलचस्प मोड़ आता है और अंत में क्या सनसनीखेज खुलासा होता है इसके लिये आपको फिल्म को देखना होगा । फिल्म का देशी होना इसकी यूअसपी कही जा सकती है काफी समय बाद ऐसी फिल्म आयी है जिसके दोनों हॉफ रोचकता उत्पन्न करते है ,हालाँकि कई जगह ऐसे लगता है शूटिंग के वक़्त शायद निर्देशक के दिमाग में गैंग्स ऑफ़ वासेपुर चल रही थी ,जिस कारण फिल्म में पूरा देशीपना दिखता है ,फिल्म 18 साल उम्र के ऊपर के लिये है तो गालियों को तरजीह दी गयी है । ‘आजकल तो काला ज्यादा डिमांड में है’ ,‘हम तो आउटसोर्सिंग करते हैं यमराज के लिए ‘ और ‘काहे घबरा रहे हो, फ्री में थोड़ी मारेंगे,’  जैसे डायलॉग एक तबके को सीटी मारने के लिये मजबूर कर देंगे ।
परफॉरमेंस की बात करें तो नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने जबरदस्त काम किया है ,कॉन्ट्रेक्ट किलर के किरदार में नवाज़ अपनी छाप छोड़ पाने में सफल हुए उनका कॉन्ट्रैक्ट किलर से प्रेमी में ट्रांसफॉर्म होना प्रभावित कर जाता है वही फिल्म की अभिनेत्री बिदिता बाग़ का भी अभिनय अच्छा है ,वह कई इंटीमेट सीन्स में तो दमदार नजर आयी है ही बल्कि इमोशनल सीन में भी बेजोड़ रही है जबकि जतिन, दिव्या दत्ता का भी अभिनय तारीफ़ के काबिल है। फिल्म ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज़’ को आप परिवार के साथ तो नहीं लेकिन अकेले जरूर देख सकते हैं ,मैं इस फिल्म को पांच में से तीन स्टार देता हूँ ।

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Mudit Bansal
Engineer By Education| Lyricist | Critic| Author | Art in Heart |
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