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टॉयलेट : संदेशों का ओवरडोज़

Review - Toilet Ek Prem Katha

इस शुक्रवार सिल्वर स्क्रीन पर दस्तक दी है बहुप्रतीक्षित टॉयलेट एक प्रेम कथा ने जिसको निर्देशित किया है श्री नारायण सिंह ने एवं मुख्य भूमिका निभायी है अक्षय कुमार एवं भूमि पेडनेकर ने । ज्ञात हो यह फिल्म एक सामाजिक मुद्दे पर बनी है जिसकी कहानी अधिकांशतः लोग पहले से ही जानते है ,भारत सरकार के स्वच्छता अभियान के मद्देनजर  बनायी गयी इस फिल्म का प्रचार काफी दिनों से हुआ है यहां तक की प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस फिल्म के प्रति ट्वीट किया था ।काफी समय से हिंदी बॉक्स ऑफिस सुनसान ही पड़ा है ,पिछले हफ्ते रिलीज़ किंग खान अभिनीत जब हैरी मेट सेजल भी पूर्णतया फेल रही है । अब देखना दिलचस्प होगा क्या खिलाडी कुमार बॉक्स ऑफिस पर जादू क्रिएट करने में कामयाब हो पाते है या नही !

फिल्म की कहानी कुछ इस तरह से लिखी गयी है कि मुख्य पात्र मांगलिक बने अक्षय कुमार यानि केशव को भूमि यानी जया से प्यार हो जाता है ,दोनों मध्यम परिवार से ताल्लुक रखते है और काफी जद्दोजहद के बाद दोनों की शादी हो जाती है ,शादी के अगले दिन जया को पता चलता है कि केशव के घर टॉयलेट नही है और इस वजह से महिलाओं को  खुले में शौच करने के लिए जाना पड़ता है…जया को यह बात चुभ जाती है और वो केशव का घर छोड़कर चली जाती है क्योंकि उसके ससुरालवाले घर में शौचालय बनवाने को गंवारा नही समझते , बाद में जब केशव को जया के लिए अपने प्यार का अहसास होता है और वो पूरे गांव में शौचालय बनाने की मुहिम शुरू करता है ,खिलाडी कुमार की इस मुहिम का विरोध होता है अर्थात घर के लोग ही सबसे पहले उसकी राह में रोड़ा उत्पन्न करते है लेकिन केशव हार नहीं मानता और हर संभव कोशिश करता है फिर…! क्या केशव जया के लिए शौचालय बनवा पाता है ? क्या जया वापस आयेगी ? इसको जानने के लिये आपको फिल्म को देखना होगा ।
फिल्म का पहला भाग काफी रोचक रखा गया है जिसमे अक्षय कुमार ने पूरा न्याय किया है ,अपने संवादों से दर्शकों की नजरों को स्क्रीन से हटने नही दिया है पर इंटरवल के बाद फिल्म अपनी लय खोती नजर आती है ,फिल्म में बार बार दोहराव नज़र आने लगता है जो मुद्दा शुरू में दिलचस्प लग रहा था वो अंत तक उबाऊ लगने लगता है जिसका मुख्यतः कारण फिल्म की एडिटिंग है जिस कारण फिल्म की रफ़्तार काफी धीमी हो जाती है
 अक्षय कुमार ने हमेशा की तरह काबिलए तारीफ़ काम किया है जबकि अधिक सराहना करनी होगी भूमि पेडनेकर की जिन्होंने दम लगा के अहीशा के बाद फिर से यादगार परफॉरमेंस दी है जबकि दिव्येन्दु की भी कॉमिक टाइमिंग अच्छी रही है ।
फिल्म का म्यूजिक औसत दर्जे का ही रहा है ,’हंस मत मंगली प्यार हो जायेगा ‘ को दर्शकों ने पसंद किया है ,लेकिन कोई भी गाना चार्टबस्टर नही गया है ।ग्रामीण समाज / कस्बों की एक मुख्य परेशानी पर आधारित होते हुए फिल्म की कहानी कुछ ज्यादा प्रभावित तो नही करती पर स्वच्छता के महत्‍व जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रकाश डाल जाती है ,मैं टॉयलेट एक प्रेम कथा को पांच में से ढाई स्टार देता हूँ ।- मुदित बंसल

Mudit Bansal
Engineer By Education| Lyricist | Critic| Author | Art in Heart |
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