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Review: #LipstickUnderMyBurkha चाहते बार बार

Lipstick Under My Burkha review By Mudit Bansal

इस शुक्रवार सिल्वर स्क्रीन पर दस्तक दी है बहुचर्चित फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्क़ा’ ने । विदेशी धरती पर झंडे गाड़ चुकी इस फिल्म को भारत में सेंसर बॉर्ड ने सर्टिफिकेट देने से ही मना कर दिया था ,उसके बाद अपीलेट ट्राइब्यूनल से इस फिल्म को जैसे-तैसे कुछ कट्स और ‘ए’ सर्टिफिकेट के साथ रिलीज़ किया गया है जिसका सामना मुन्ना माइकल से है , ज्ञात हो फिल्म का निर्देशन अलंकृता श्रीवास्तव ने किया है । हमारे समाज में महिलाओं की पीड़ा कई भूमिकाओं में सामने आती रही है चाहे महिला कुवांरी हो, शादीशुदा हो या फिर उम्रदराज। कोई जींस और अपनी पसंद के कपड़े पहनने की लड़ाई लड़ रही है, तो कोई अपनी मर्जी से सेक्स लाइफ जीने की ,कोई अपने पति की सेक्स लत से परेशान है तो कोई उम्रदराज होने पर भी हसीन सपने देख रही है दरअसल  सब अपनी फैंटसी/चाहतों को सच होते देखना चाहती हैं बस यही तो इस फिल्म की कहानी है । ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्क़ा’ चार अलग-अलग उम्र की महिलाओं की कहानी है, जो की भोपाल के किसी कोने के इर्द गिर्द बुनी गयी है ।अपनी जिंदगी को रोचक अंदाज में अपनी फैंटसी के साथ जीना चाहती है लेकिन समाज में कुछ असामाजिक तत्व उनकी राह में रोड़ा उत्पन्न करते है । फिल्म की शुरुआत एक सीन से होती है, जिसमें पहला किरदार एक बुर्क़ा पहने एक लड़की प्लाबिता अर्थात रिहाना एक मॉल से लिपस्टिक चुराती है और फिर वॉशरूम में जींस-टीशर्ट चेंज करके और लिपस्टिक लगाकर कॉलेज में अपने मित्रों के बीच जाती है और जीन्स पहनने के हक़ को लेकर कॉलेज में नारेबाजी करती है ,थाने तक पहुँच जाती है ,फिर ….!

Lipstick Under My Burkha 1.jpgदूसरा किरदार रत्ना पाठक अर्थात उषा एक 55 साल की एक विधवा औरत के रोल में हैं जिसके मन में ख्वाहिशें अभी भी ज़िंदा है जो धार्मिक किताबों में छिपाकर फैंटसी नॉवल पढ़ती है और उसकी नायिका रोजी की तरह अपनी जिंदगी में भी किसी हीरो की तलाश कर रही है इसी चाहत में वह सत्संग के बहाने स्विमिंग सीखने जाती है और उसे स्विमिंग कोच से क्रश हो जाता है ,फिर …..!
तीसरा किरदार शिरीन नाम का है जिसको कोंकणा शेन ने निभाया है जो की शादी शुदा है और 3 बच्चो की माँ है अपने पति की चोरी से सामान बेचती है पर उसका पति उसे बस सेक्स ऑब्जेक्ट ही मानता है ,जब भी उसके पास आता है उसे न चाहते हुए भी प्रेग्नेंट करके चला जाता है लेकिन एक दिन जब उसे पता चलता है कि उसके पति का किसी और के साथ अफेयर है फिर …!
जबकि चौथा किरदार अहाना मेकअप आर्टिस्ट है जो अपने फोटोग्राफर बॉयफ्रेंड अरशद से शादी करना चाहती है लेकिन  वह उसे ज्यादा तवज्जो नही देता बस उसका इस्तेमाल करता है, लीला की शादी कही ओर फिक्स हो जाती है ,उसका होने वाला पति उसका एसएमएस देख लेता है ,फिर ..!

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इंटरवल तक यह चारों किरदार अपने सपनों को संजोय रखते है पर इंटरवल के बाद उन्हें पूरी जतन से सच करने की कोशिश करती हैं हालांकि वे अपने मकसद में कितना कामयाब हो पाती हैं इसके लिये आपको फिल्म को देखना होगा ।निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव ने बेहद जोरदार अंदाज में किरदारों को स्क्रीन पर गढ़ा है ,दर्शाये गये कई सेक्स सीन कही से भी फूहड़ /वाहियात नही लगते ।अगर फिल्म की कहानी बढ़िया हो तो किरदार जंचते है इसी सापेक्ष सभी किरदारों ने संजीदा अभिनय किया है फिल्म का क्लाइमेक्स लोगो की सोच पर छोड़ा गया है कि वो इसको किस रूप में लेते है ,जो कि इस फिल्म की ख़ूबसूरती है । आज के इस नये युग में एक लड़की/महिला की क्या चाहत हो सकती है वो क्या देखना चाहती है क्या करना चाहती है उसकी जिज्ञासाएं क्या हो सकती है  “लेकर मास्टरबेट से सेक्स के लिए पहल करना, गाली /डबल मीनिंग बातें और पति के रवैये से परेशान सेक्स के लिए मना करना सहित तमाम बातें/ख्वाइशें फिल्म में बड़ी शालीनता से दिखायी गयी है “अर्थात वो किसी न किसी किरदार से लगाव महसूस जरूर करेंगी चाहे वो किरदार अपनी सगाई वाले दिन अपने बॉयफ्रेंड से सम्बन्ध बनाने की इच्छा रखने वाली लीला का हो या तमाम बंदिशों को पिछाड़ती प्लाबिता का हो ।

कुल मिलाकर समाज को आइना दिखाती ..अस्तित्व की खोज करती लिप्सिटिक अंडर माय बुर्क़ा को मैं पांच में से चार स्टार देता हूँ।

Mudit Bansal
Engineer By Education| Lyricist | Critic| Author | Art in Heart |
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